Saturday, February 26, 2011

हर दिल में एक शायर

उन्होंने बोला "आजकल कवियों की कमी सी हो गयी है"
मैंने कहा "हर इंसान तो आज शायर है".

उन्होंने बोला "पर कवितायेँ कम सुनाई देती हैं आजकल"
मैंने कहा "जनाब! धड़कनों को टटोलिये तो जरा

..............हर दिल में एक शायर बस्ता है" !!!

Friday, February 18, 2011

"टीम इंडिया"

धड़कनें रुक जाती हैं
और देश ठहरता है
हाथ में बल्ला लेकर जब
सचिन मैदान पे उतरता है

हर बोलर को ठोकने को
जब सहवाग बल्ला घुमाता है
Steyn हो या हो ब्रेट ली
फिर हर कोई थर्राता है

गंभीर से पंगे लेने से
अब हर खिलाड़ी डरता है
सब तो सिर्फ बल्ले से करते हैं
वो हाथो से भी ठुकाई करता है

जब pitch पे आकर के
कोहली कुछ देर टिक जाता है
लक्ष्य फिर कितना भी बड़ा हो
वो आसानी से पास दिख जाता है

युवराज के उन छक्को को
यु भूलना नहीं आसान है
फिर वो दोहराए इतिहास
बस इतना उससे अरमान है

चीते सी तेजी से
रैना जब गेंद पकड़ता है
रन लेने अगर दौड़े कोई
तो सीधे stump उखाडता है

अपने ही निराले अंदाज में
जब धोनी खेलने आता है
single हो या हो छका
उसका हर शोट भाता है

गेंद और बल्ले दोनों से
फिर भज्जी खेल खेलता है
योर्कर हो या हो शोर्ट पिट्च
वो किसी भी बाल को पेलता है

फिर विक्केट उखाड़ने को
जहीर गेंद घुमाता है
नेहरा की Line Length के आगे
कोई कोई टिक पाता है

पिट्च पर डांस करने में
श्रीसंथ एकदम बिंदास है
हैं तो ये सिर्फ ११ ही
पर हर कोई इनमे ख़ास है

ये हमारी "टीम इंडिया"
सारे देश को प्यारी है
बहुत हुआ ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया
अबके हमारी बारी है !!!





Thursday, February 10, 2011

काबू

चलाई हैं तुफानो में भी कश्तियाँ हमने !

थपेड़े तो लगे पर समुन्दर पे काबू पा लिया !!

Saturday, January 8, 2011

उस वक़्त में

वो वक़्त ही कुछ और था
तब कुछ अलग ही हवा बहती थी
मैं नहीं ये धरती है तेरी माँ
हर माँ अपने बच्चे से कहती थी

क्या खून था उस वक़्त का
उस खून कि क्या जवानी थी
हरा दिल था सराबोर प्रेम से
हर दिल कि एक ही प्रेम कहानी थी

कुछ कर जाएँ देश के लिए
वरना जीवन धिक्कार था
ऐसे भी कुछ लोग जन्मे हैं
जिन्हें सिर्फ देश से प्यार था

आजादी कि उस चाह में
उन्होंने सब कुछ गवाया था
हमारी पीढ़ी जीए अपने भारत में
उन्होंने बस इतना भर पाया था

आज देश को लूटने को
हर कोई हर कोशिश करता है
लगता है जैसे सब कहानियां हैं
कौन देश कि खातिर मरता है

अफ़सोस रहेगा मुझे हमेशा
कि मैं उनके जैसा क्यों नहीं बना
गलती तुझसे भी हुई ए-खुदा
तुने मुझे उस वक़्त में नहीं जना.

Monday, January 3, 2011

अब !

पैमानों से नहीं लडखडाते कदम अब हमारे !
यूँ ही बैठे बैठे हम महखाने पी जाते हैं !!

Sunday, January 2, 2011

वो ...

वो आ जाता उस दिन तो मैं मान जाता की है खुदा

हर पत्थर को छुआ था मैंने तब, हर सदगे में सर झुकाया था !

Sunday, December 26, 2010

आज सोचता हू !

मंजिले भी उसकी थी
रास्ता भी उसका था
एक मैं अकेला था
काफिला भी उसका था

साथ साथ चलने की
सोच भी उसकी थी
फिर राहें बदलने का
फैसला भी उसका था

आज सोचता हू तो
दिल सवाल करता है
लोग तो उसके थे
क्या खुदा भी उसका था ?