थपेड़े तो लगे पर समुन्दर पे काबू पा लिया !!
Thursday, February 10, 2011
Saturday, January 8, 2011
उस वक़्त में
वो वक़्त ही कुछ और था
तब कुछ अलग ही हवा बहती थी
मैं नहीं ये धरती है तेरी माँ
हर माँ अपने बच्चे से कहती थी
क्या खून था उस वक़्त का
उस खून कि क्या जवानी थी
हरा दिल था सराबोर प्रेम से
हर दिल कि एक ही प्रेम कहानी थी
कुछ कर जाएँ देश के लिए
वरना जीवन धिक्कार था
ऐसे भी कुछ लोग जन्मे हैं
जिन्हें सिर्फ देश से प्यार था
आजादी कि उस चाह में
उन्होंने सब कुछ गवाया था
हमारी पीढ़ी जीए अपने भारत में
उन्होंने बस इतना भर पाया था
आज देश को लूटने को
हर कोई हर कोशिश करता है
लगता है जैसे सब कहानियां हैं
कौन देश कि खातिर मरता है
अफ़सोस रहेगा मुझे हमेशा
कि मैं उनके जैसा क्यों नहीं बना
गलती तुझसे भी हुई ए-खुदा
तुने मुझे उस वक़्त में नहीं जना.
Monday, January 3, 2011
Sunday, January 2, 2011
वो ...
वो आ जाता उस दिन तो मैं मान जाता की है खुदा
हर पत्थर को छुआ था मैंने तब, हर सदगे में सर झुकाया था !
Sunday, December 26, 2010
आज सोचता हू !
मंजिले भी उसकी थी
रास्ता भी उसका था
एक मैं अकेला था
काफिला भी उसका था
साथ साथ चलने की
सोच भी उसकी थी
फिर राहें बदलने का
फैसला भी उसका था
आज सोचता हू तो
दिल सवाल करता है
लोग तो उसके थे
क्या खुदा भी उसका था ?
Saturday, October 16, 2010
.........हाथ में खंजर था
(Note: A poem about Indo-Pak partition)
हर और तबाही छाई थी
और शैतानो का मंजर था
मैं देख रहा था खड़ा हुआ
बापू के हाथ में खंजर था
पहले धर्मो में बाटा था
फिर हिस्सों में काटा था
जिस और भी जाती थी नज़र
मायूसी थी और सन्नाटा था
हर मुस्लिम ने दफनाया था कुछ अपनों को
हर हिन्दू ने अपनों की चिता जलाई थी
लड़े थे गुलामी की रात से मिलकर
और उस रात ने क्या खूब सुबह पायी थी
गौरो को मिली थी आजादी उस दिन
हमारे हिस्से फिर गुलामी आई थी
लुटती देखकर इज्जत तब
भारत माता रोई थी चिल्लाई थी
डूबा था देश खून की होली में
हर तरफ लाशों का समंदर था
मैं देख रहा था खड़ा हुआ
बापू के हाथ में खंजर था
...........बापू के हाथ में खंजर था !!!
Thursday, October 7, 2010
....खेल है
अखबारों में छपते है जो
उनके घर नोटों का खेल है
छपकर भी बचते है जो
वो सारा वोटो का खेल है
किसी के लिए बस कोर्ट है खाफी
किसी के लिए पूरा Stadium खेल है
किसी के लिए बस सो मीटर की बात है
किसी के लिए पूरा शहर खेल है
किसी ने जिंदगी दे दी देश को
किसी के लिए देश से सिर्फ लेना खेल है
आज भी चालीश करोड़ खिलाडी हैं भारत में
जिनके लिए सिर्फ रोटी कपडा ही खेल है
-अंकुर
Subscribe to:
Posts (Atom)