Friday, August 9, 2013

नेता जी

आपके एक इशारे से पूरा प्रदेश हिल सकता है, जानता हु मैं
पर थोड़ा संभाल के हिलाओ नेता जी, कहीं जनता जाग न जाए

मेरी कोई कल्पना

आज की वास्तिवकता क्यों मेरी कल्पनाओ को भी प्रेरित नहीं कर पाती है |
क्यों हर रोज मेरी कलम से एक दो कविता नहीं निकलती जाती है ||

महीनो गुजर जाते हैं चंद शब्दों के जोड़ भाग में  |
क्यों नहीं मेरी कोई कल्पना ही वास्तिवकता बन जाती है ||

Monday, August 5, 2013

पर मैं ठहरा नहीं

कभी राहें आसान थीं कभी मुश्किल
पर मैं ठहरा नहीं

कभी ना राहें थीं ना थी मंजिल
पर मैं ठहरा नहीं 

Thursday, August 1, 2013

भारत निर्माण

कुछ के कुत्ते भी अमरीका और यूरोप के बिस्कुट खाते हैं
कुछ को दो वक़्त की रोटी भी कूड़े के ढेर में ढूँढनी पड़ती है


भारत निर्माण

शहर में फैक्ट्री की सारी मशीनें रात भर धकाधक चलती रहती हैं
गाँव की झोपडी में लगा एक बल्ब घंटे भर के लिए भी नहीं जलता

इम्तेहान

उसकी एक हाँ में अटकी मेरी सारी जिंदगी थी
वो ये बखूबी जानती थी वो ये बखूबी समझती थी

उसने मेरे प्यार का इम्तेहान लिया और मैंने अपनी जिंदगी का 

Wednesday, July 31, 2013

Since 1947

सवाल ये नहीं हे की सियासी फैसले अकसर खून से ही क्यों लिखे जाते हैं ?
सवाल ये हे की जहां कुछ बूंदों से काम हो सकता है वहाँ समंदर क्यों बहाए जाते हैं ??